हरदोई । उत्तर प्रदेश को आज एक ऐसी सौगात मिली जिसका इंतज़ार सालों से था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरदोई की धरती पर खड़े होकर 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया – और इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के पश्चिम से पूरब तक एक नई कनेक्टिविटी की कहानी शुरू हो गई।
यह एक्सप्रेसवे सिर्फ कंक्रीट और डामर का रास्ता नहीं है। यह उन 12 जिलों के करोड़ों लोगों की उम्मीदों का रास्ता है जो दशकों से बेहतर सड़क, बेहतर बाज़ार और बेहतर जीवन का इंतज़ार कर रहे थे।
पाँच साल में बनकर तैयार – यही है “मोदी की रफ्तार”

पीएम मोदी ने उद्घाटन के मौके पर गर्व के साथ कहा कि देश के सबसे लंबे हरित गलियारों में शुमार यह एक्सप्रेसवे पाँच साल से भी कम वक्त में पूरा हुआ। यह बात इसलिए मायने रखती है क्योंकि इस देश में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट दशकों तक लटके रहने के लिए जाने जाते थे। उन्होंने कहा – “ये वर्तमान सरकार के काम करने की गति और तरीका है।”
मेरठ से प्रयागराज – एक ही रास्ते पर तीन UP
इस एक्सप्रेसवे की खूबी यह है कि यह तीन अलग-अलग उत्तर प्रदेश को एक धागे में पिरोता है। पश्चिमी यूपी – जहाँ व्यापार है, मंडियाँ हैं, NCR की धड़कन है। मध्य यूपी – जहाँ खेत हैं, किसान हैं, अनाज है लेकिन बाज़ार तक पहुँचने की राह नहीं थी। और पूर्वी यूपी – जहाँ संस्कृति है, विरासत है, काशी और प्रयाग का पुण्य है। अब तीनों एक-दूसरे के करीब आ गए हैं।
किसान की तकलीफ – अब होगी दूर?
मोदी ने एक बहुत ज़रूरी बात कही जो अक्सर बड़े उद्घाटनों में छूट जाती है – किसान की तकलीफ। उन्होंने माना कि इन इलाकों के किसान सालों से कोल्ड स्टोरेज न होने और खराब सड़कों की वजह से अपनी फसल का सही दाम नहीं पा रहे थे। अब जब माल तेज़ी से बड़े बाज़ारों तक पहुँचेगा – तो उम्मीद है कि किसान की जेब में भी उनके फसल की सही कीमत आएगी।
नौकरी, उद्योग और ब्रह्मोस तक का सफर
हरदोई जैसे जिलों में फार्मास्यूटिकल, वस्त्र, हथकरघा, चमड़ा और हस्तशिल्प के औद्योगिक गलियारे बनाए जा रहे हैं। मुद्रा योजना और ODOP से छोटे उद्यमियों को पंख मिल रहे हैं। और बात सिर्फ छोटे उद्योगों तक नहीं रुकती। पीएम ने याद दिलाया कि भारत के दो रक्षा गलियारों में से एक उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है – जहाँ ब्रह्मोस जैसी मिसाइलें बन रही हैं। नोएडा में सेमीकंडक्टर प्लांट की नींव रखी जा चुकी है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता बन गया है – और उसका आधा उत्पादन यूपी में होता है।
यानी यह एक्सप्रेसवे जिस UP से गुज़रेगा, वह UP अब “बीमारू” नहीं – एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दौड़ में है।
गंगा – माँ भी, प्रेरणा भी:
पीएम मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत जिस भाव से की, वह राजनीतिक भाषण से ज़्यादा एक आस्थावान इंसान की बात लगी। उन्होंने कहा –
“जैसे माँ गंगा हज़ारों वर्षों से इस देश की जीवनरेखा रही हैं, वैसे ही यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के विकास की नई जीवनरेखा बनेगा।”
राज्य सरकार ने एक्सप्रेसवे का नाम माँ गंगा के नाम पर रखा – मोदी ने इसे विरासत और विकास के संगम की संज्ञा दी।
अब UP में 21 एयरपोर्ट – और गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ाव
पीएम ने कहा कि पहले यूपी में गिने-चुने हवाई अड्डे थे। आज 21 एयरपोर्ट चालू हैं जिनमें 5 अंतरराष्ट्रीय हैं। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट – जो गंगा एक्सप्रेसवे कॉरिडोर से कुछ घंटों की दूरी पर है – इस पूरे नेटवर्क की नई कड़ी बनेगा। सड़क, हवाई, रेल – तीनों मार्ग मिलकर यूपी को देश का लॉजिस्टिक्स हब बनाने की तैयारी में हैं।
आखिरी बात – वादा या हकीकत?
गंगा एक्सप्रेसवे बना – यह सच है। 594 किलोमीटर का यह रास्ता अब नक्शे पर नहीं, ज़मीन पर है। लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होती है।
किसान को सही दाम मिलेगा या नहीं। औद्योगिक गलियारों में नौकरियाँ आएंगी या नहीं। एक्सप्रेसवे के किनारे बसे गाँव बदलेंगे या नहीं।
जनता देख रही है। और जनता याद रखती है।
