गोंडा: भारतीय कुश्ती एक बार फिर गंभीर विवाद के केंद्र में है। स्टार पहलवान और हरियाणा की विधायक विनेश फोगाट ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि वह उन छह महिला पहलवानों में शामिल हैं, जिन्होंने पूर्व WFI अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने इन बातों का उल्लेख करते हुए कुश्ती महासंघ द्वारा घोषित रैंकिंग टूर्नामेंट की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
विनेश ने आरोप लगाया है कि गोंडा में प्रस्तावित इस प्रतियोगिता में निष्पक्ष मुकाबला “लगभग नामुमकिन” है, क्योंकि आयोजन स्थल और पूरी प्रक्रिया पर पूर्व WFI प्रमुख बृज भूषण शरण सिंह का कथित प्रभाव है। यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब देश में खेल प्रशासन, महिला सुरक्षा और राजनीत- तीनों मुद्दे एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए दिखाई दे रहे हैं। महिला पहलवान के इस वीडियो के सामने आने के बाद न केवल खेल जगत में बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है।
रैंकिंग टूर्नामेंट पर गंभीर सवाल
महिला पहलवान ने अपने वीडियो संदेश में बताया कि लगभग एक महीने पहले कुश्ती महासंघ द्वारा एक रैंकिंग टूर्नामेंट की घोषणा की गई थी। यह टूर्नामेंट उत्तर प्रदेश के गोंडा में आयोजित किया जा रहा है। पहलवान का कहना है कि यह वही स्थान है, जहां पूर्व सांसद और पूर्व WFI अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह का घर और उनका निजी कॉलेज स्थित है।
उनका आरोप है कि ऐसे माहौल में यह मान लेना कि मेहनत करने वाले हर खिलाड़ी को उसका पूरा हक मिलेगा, “एक भ्रम” से ज्यादा कुछ नहीं है। पहलवान के अनुसार, मुकाबलों की प्रक्रिया, रेफरी के फैसले और यहां तक कि किसे जिताना और किसे हराना है- यह सब कथित तौर पर पहले से तय हो सकता है।
गोंडा क्यों बना विवाद का केंद्र?
गोंडा को लेकर उठ रहे सवाल महज भौगोलिक नहीं हैं, बल्कि सीधे तौर पर conflict of interest से जुड़े हैं। महिला पहलवान ने आरोप लगाया कि जिस स्थान पर टूर्नामेंट आयोजित किया जा रहा है, वहां बृज भूषण शरण सिंह का सामाजिक और संस्थागत प्रभाव लंबे समय से रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि बृज भूषण से जुड़े निजी कॉलेजों में पहले भी कुश्ती से संबंधित गतिविधियां आयोजित होती रही हैं। ऐसे में खिलाड़ियों के लिए यह भरोसा करना मुश्किल है कि प्रतियोगिता पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होगी।
“अगर कोई अनहोनी हुई तो जिम्मेदार सरकार होगी”
अपने बयान में महिला पहलवान ने एक सख्त चेतावनी भी दी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि वह या उनकी टीम के सदस्य टूर्नामेंट के दौरान किसी भी तरह की दुर्घटना या दबाव का शिकार होते हैं, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी भारत सरकार की होगी।
यह बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसमें सीधे तौर पर सरकार और खेल प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया गया है। आमतौर पर खिलाड़ी ऐसे मामलों में खुलकर सरकार की जिम्मेदारी तय करने से बचते हैं, लेकिन विनेश का लहजा असाधारण रूप से सख्त दिखाई दिया।
तीन साल पुराना है विवाद
यह विवाद कोई नया नहीं है। करीब तीन साल पहले देश की कई शीर्ष महिला पहलवानों ने तत्कालीन कुश्ती महासंघ अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे। इन शिकायतों के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई, जो अब भी जारी है।
इन आरोपों के चलते कुश्ती महासंघ की गतिविधियों पर भी असर पड़ा। महासंघ को लेकर लगातार सवाल उठते रहे और खेल मंत्रालय को कई बार हस्तक्षेप करना पड़ा। हालांकि, बृज भूषण शरण सिंह ने सभी आरोपों से इनकार किया है और खुद को निर्दोष बताया है।
कुश्ती महासंघ और खेल मंत्रालय की भूमिका
महिला पहलवान ने अपने बयान में खेल मंत्रालय और कुश्ती महासंघ – दोनों पर ही गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम में सरकार और मंत्रालय “मूक दर्शक” बने हुए हैं। उन्होंने खेल मंत्रालय की चुप्पी को लेकर भी सवाल उठाये।
महिला आरक्षण
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब केंद्र सरकार महिला आरक्षण विधेयक को लेकर विपक्ष पर हमलावर है। सरकार का आरोप है कि विपक्ष की वजह से संसद में महिला आरक्षण से जुड़ा अहम विधेयक पास नहीं हो सका।
हालांकि, महिला पहलवानों से जुड़े इस विवाद ने सरकार के इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आलोचकों का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में महिला सशक्तिकरण को लेकर गंभीर है, तो उसे महिला खिलाड़ियों की शिकायतों पर भी उसी तत्परता से कार्रवाई करनी चाहिए।
2027 यूपी विधानसभा चुनाव और सियासी मायने
इस पूरे मामले को 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है। गोंडा और आसपास के इलाकों में बृज भूषण शरण सिंह का प्रभाव लंबे समय से माना जाता रहा है।
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर यह चर्चाएं भी तेज हैं कि बृज भूषण शरण सिंह आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक दल बदल सकते हैं। हालांकि, इन अटकलों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ऐसे समय में महिला पहलवान का यह बयान राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह मामला और तूल पकड़ता है, तो यह मौजूदा सरकार के लिए एक बड़ा सिरदर्द साबित हो सकता है।
खिलाड़ियों के भविष्य पर मंडराता खतरा
रैंकिंग टूर्नामेंट किसी भी खिलाड़ी के करियर के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इन्हीं प्रतियोगिताओं के आधार पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चयन होता है। यदि इन टूर्नामेंट्स की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं, तो सबसे ज्यादा नुकसान खिलाड़ियों को ही होता है।
आगे क्या?
अब सभी की निगाहें खेल मंत्रालय, कुश्ती महासंघ और जांच एजेंसियों पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि रैंकिंग टूर्नामेंट को लेकर उठे सवालों पर कोई ठोस कार्रवाई होती है या नहीं।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि विवाद को शांत करने का एकमात्र रास्ता निष्पक्ष जांच, पारदर्शी आयोजन और खिलाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
महिला पहलवान का यह बयान सिर्फ एक खेल विवाद नहीं है। यह मामला महिला सम्मान, निष्पक्ष खेल व्यवस्था और सत्ता के प्रभाव से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा है। यदि समय रहते इन सवालों का जवाब नहीं दिया गया, तो इसका असर सिर्फ कुश्ती तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत की खेल छवि और राजनीति-दोनों पर पड़ेगा।
