नई दिल्ली, 27 मार्च 2026। पश्चिम एशिया में उभरते संकट और उसके भारत पर संभावित आर्थिक व सामरिक प्रभाव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों तथा उपराज्यपालों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन भी उपस्थित रहे।
सरकार की चार प्राथमिकताएं
प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक में स्पष्ट किया कि मौजूदा संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार की चार मुख्य प्राथमिकताएं हैं – आर्थिक और व्यापारिक स्थिरता बनाए रखना, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना, नागरिकों के हितों की रक्षा करना, और उद्योग एवं आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना। उन्होंने कहा कि 3 मार्च से एक अंतर-मंत्रालयी समूह प्रतिदिन स्थिति की समीक्षा कर रहा है और समय-समय पर आवश्यक निर्णय लिए जा रहे हैं।
कोविड की तरह ‘Team India’ की भावना से काम करने का आह्वान
प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि कोविड-19 महामारी के दौरान केंद्र और राज्यों ने मिलकर ‘Team India’ की भावना से काम किया था और आपूर्ति श्रृंखला, व्यापार तथा आम जनजीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया था। उन्होंने कहा कि वही सहयोग और समन्वय की भावना आज भी भारत की सबसे बड़ी शक्ति है और इसी के बल पर देश इस चुनौती से भी पार पाएगा।
जमाखोरी-मुनाफाखोरी पर सख्ती के निर्देश
प्रधानमंत्री ने राज्यों को आपूर्ति श्रृंखला सुचारू रखने और जमाखोरी तथा मुनाफाखोरी के विरुद्ध कड़े कदम उठाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि राज्य और जिला स्तर पर कंट्रोल रूम सक्रिय किए जाएं और प्रशासनिक सतर्कता बनाए रखी जाए ताकि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में कोई व्यवधान न आए।
कृषि क्षेत्र में अग्रिम योजना पर जोर
प्रधानमंत्री ने कृषि क्षेत्र में अग्रिम योजना की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि आगामी खरीफ सीजन को देखते हुए उर्वरकों के भंडारण और वितरण की निगरानी पर विशेष ध्यान दिया जाए ताकि किसानों को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।
सीमावर्ती और तटीय राज्यों को विशेष सतर्कता के निर्देश
प्रधानमंत्री ने सीमावर्ती और तटीय राज्यों को शिपिंग, आवश्यक आपूर्ति और समुद्री गतिविधियों से जुड़ी उभरती चुनौतियों के प्रति विशेष सतर्कता बरतने को कहा। साथ ही उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि जिन राज्यों के नागरिक पश्चिम एशिया में रह रहे हैं, वे हेल्पलाइन सक्रिय करें, नोडल अधिकारी नियुक्त करें और प्रभावित परिवारों की मदद के लिए जिला स्तर पर सहायता तंत्र स्थापित करें।
अफवाहों और ऑनलाइन धोखाधड़ी के खिलाफ सतर्कता
प्रधानमंत्री ने गलत सूचनाओं और अफवाहों के प्रसार पर चिंता जताते हुए कहा कि सटीक और विश्वसनीय जानकारी का समय पर प्रसार जनता में अनावश्यक भय को रोकने के लिए आवश्यक है। उन्होंने ऑनलाइन धोखाधड़ी और फर्जी एजेंटों के प्रति भी विशेष सावधानी बरतने की अपील की।
वैकल्पिक ऊर्जा और दीर्घकालिक तैयारी पर फोकस
प्रधानमंत्री ने तात्कालिक राहत के साथ-साथ दीर्घकालिक तैयारी पर भी जोर दिया। उन्होंने राज्यों से बायोफ्यूल, सौर ऊर्जा, गोबरधन योजना, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और पाइप्ड नेचुरल गैस कनेक्शन के विस्तार में तेजी लाने का आग्रह किया। साथ ही देश में तेल और प्राकृतिक गैस की घरेलू खोज को बढ़ावा देने में राज्यों से सक्रिय सहयोग की अपेक्षा की।
रक्षा मंत्री और कैबिनेट सचिव का संबोधन
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बैठक में कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार इस संकट से निपटने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है। उन्होंने LPG की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने और पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती जैसे सकारात्मक कदमों का उल्लेख किया। कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन ने प्रेजेंटेशन के जरिए मौजूदा स्थिति का विस्तृत विवरण दिया और राज्यों के लिए आवश्यक सिफारिशें सामने रखीं।
मुख्यमंत्रियों ने जताया भरोसा, केंद्र के फैसलों का किया स्वागत
बैठक में सभी मुख्यमंत्रियों ने केंद्र सरकार के प्रयासों की सराहना की और प्रधानमंत्री की कूटनीतिक पहल की भी प्रशंसा की जिसके तहत विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न देशों से संपर्क साधा गया। मुख्यमंत्रियों ने यह भी बताया कि उनके राज्यों में पेट्रोल, डीजल और LPG की पर्याप्त उपलब्धता बनी हुई है और निरंतर निगरानी तंत्र सक्रिय है। व्यावसायिक LPG आवंटन को 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 70 प्रतिशत करने के निर्णय का सभी मुख्यमंत्रियों ने स्वागत किया और केंद्र के साथ पूर्ण समन्वय बनाए रखने का आश्वासन दिया।
यह बैठक ऐसे समय में हुई जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापार मार्गों पर अनिश्चितता बनी हुई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से पूरा करता है, इसलिए केंद्र और राज्यों के बीच यह समन्वय बैठक नीतिगत दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
