पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के बीच प्रधानमंत्री ने देश की अर्थव्यवस्था, किसानों और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सरकार के सभी विभागों को एकजुट होकर काम करने के निर्देश दिए हैं।

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का भारत पर पड़ने वाले असर को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार शाम कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की एक अहम बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर है, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ पर संकट गहरा रहा है और वैश्विक तेल कीमतें 112 डॉलर प्रति बैरल को पार कर चुकी हैं।
बैठक में कैबिनेट सचिव ने वैश्विक हालात और सभी संबंधित मंत्रालयों द्वारा अब तक उठाए गए एवं प्रस्तावित कदमों पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दी। कृषि, उर्वरक, खाद्य सुरक्षा, पेट्रोलियम, बिजली, एमएसएमई, निर्यात, शिपिंग, व्यापार, वित्त और आपूर्ति श्रृंखला समेत तमाम क्षेत्रों पर संभावित प्रभाव और उससे निपटने के उपायों पर गहन चर्चा हुई।
किसानों की चिंता सबसे ऊपर – खाद की वैकल्पिक आपूर्ति पर मंथन
बैठक में किसानों के लिए उर्वरकों की निर्बाध उपलब्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। खरीफ सीजन को देखते हुए उर्वरकों की मांग और आपूर्ति का विस्तृत आकलन किया गया। सरकार ने स्पष्ट किया कि पिछले कुछ वर्षों में उर्वरकों का पर्याप्त भंडार बनाए रखने की नीति के कारण फिलहाल कोई तत्काल संकट नहीं है। हालांकि, भविष्य की अनिश्चितता को देखते हुए खाद की वैकल्पिक आपूर्ति के स्रोत विकसित करने पर भी सहमति बनी।
बिजली संकट की कोई आशंका नहीं – कोयला भंडार पर्याप्त
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि देश के सभी बिजली संयंत्रों में कोयले का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है, जिससे बिजली आपूर्ति में किसी भी प्रकार की कमी की आशंका नहीं है। यह जानकारी ऐसे समय में राहत देने वाली है जब वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में भारी उथल-पुथल मची हुई है।
रसायन, दवा और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र – आयात स्रोत विविध होंगे
रसायन, दवा, पेट्रोकेमिकल और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों के लिए आयात के स्रोतों में विविधता लाने पर विशेष बल दिया गया। पश्चिम एशिया पर एकल निर्भरता कम करने और वैकल्पिक बाज़ारों से आपूर्ति सुनिश्चित करने की रणनीति पर मंत्रालयों को काम करने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही भारतीय वस्तुओं के लिए नए निर्यात बाज़ार विकसित करने पर भी सहमति बनी ताकि वैश्विक व्यापार में आए व्यवधान से भारतीय निर्यातकों को कम से कम नुकसान हो।
PM मोदी के निर्देश – पूरी सरकार एकजुट होकर काम करे
प्रधानमंत्री ने बैठक में साफ कहा कि यह एक बदलती हुई वैश्विक स्थिति है और पूरी दुनिया किसी न किसी रूप में इससे प्रभावित है। ऐसे में सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता यह है कि आम नागरिकों को इस संकट का कम से कम असर महसूस हो। इसके लिए उन्होंने कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए –
मंत्रियों और सचिवों का समूह: PM ने निर्देश दिया कि एक समर्पित मंत्री-सचिव समूह का गठन किया जाए जो “Whole of Government” यानी पूरी सरकार के समन्वित दृष्टिकोण से काम करे।
क्षेत्रवार कार्यसमूह: प्रत्येक प्रभावित क्षेत्र के लिए अलग-अलग सेक्टोरल समूह बनाए जाएं जो सभी हितधारकों के साथ मिलकर काम करें।
राज्य सरकारों से समन्वय: PM ने राज्य सरकारों के साथ उचित तालमेल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए ताकि जमाखोरी और कालाबाजारी पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
नागरिकों को कम से कम असुविधा: सरकार के सभी अंगों को एकजुट होकर यह सुनिश्चित करना होगा कि इस वैश्विक उथल-पुथल का आम भारतीय नागरिक पर न्यूनतम प्रभाव पड़े।
हमारा विश्लेषण-
यह बैठक इस बात का संकेत है कि भारत सरकार पश्चिम एशिया संकट को केवल एक विदेश नीति की समस्या के रूप में नहीं, बल्कि एक व्यापक आर्थिक, राजनीतिक, कूटनीतिक और सामाजिक चुनौती के रूप में देख रही है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से गुज़रने वाले तेल का बड़ा हिस्सा भारत को जाता है। ईरान भारत के प्रमुख उर्वरक आपूर्तिकर्ताओं में से एक रहा है। और खाड़ी देशों में काम करने वाले 90 लाख से अधिक भारतीय प्रवासी मज़दूरों का भविष्य भी इस संकट से सीधे जुड़ा हुआ है। ऐसे में CCS की यह बैठक और इसके बाद के कदम न केवल आर्थिक नीति बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
स्रोत: PIB Delhi (Press Information Bureau)
