लखनऊ – दीपावली के बाद सामने आए आंखों की रोशनी प्रभावित करने वाली खबर ने एक गंभीर सार्वजनिक सुरक्षा संकट की ओर ध्यान खींचा है। प्लास्टिक पाइप से बनी अवैध कार्बाइड गन के इस्तेमाल से पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में कम से कम 65 बच्चों और युवाओं की आंखों की रोशनी प्रभावित हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार कई मामलों में नुकसान स्थायी है और कुछ पीड़ितों के लिए सर्जरी अथवा नेत्र प्रत्यारोपण ही विकल्प बचा है।
इन मरीजों का इलाज वाराणसी स्थित बीएचयू के क्षेत्रीय नेत्र संस्थान समेत निजी अस्पतालों में चल रहा है। मरीजों में अधिकांश 5 से 14 वर्ष की आयु के बच्चे हैं, जबकि 18 से 23 वर्ष के युवाओं के भी मामले सामने आए हैं।
सोशल मीडिया से बनी खतरनाक ‘देसी गन’
जांच और चिकित्सकीय रिपोर्ट के अनुसार बच्चों ने यूट्यूब व सोशल मीडिया पर वीडियो देखकर लगभग 300 रुपये के प्लास्टिक पाइप और केमिकल से कार्बाइड गन तैयार की। दिवाली के दौरान वाराणसी, आजमगढ़, मऊ, गाजीपुर, बलिया, जौनपुर सहित कई जिलों में इसका खुलेआम इस्तेमाल हुआ।
विशेषज्ञों का कहना है कि कार्बाइड से निकलने वाली गैस और उसके कण आंखों में प्रवेश कर कॉर्निया व आइरिस (काली पुतली) को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर देते हैं। कई मामलों में पुतली आपस में चिपक भी गई है, जिससे दृष्टि समाप्त हो गई।
बीएचयू में डेढ़ महीने में 40 से अधिक केस
बीएचयू के क्षेत्रीय नेत्र संस्थान के अनुसार-
– पिछले डेढ़ महीने में लगभग 40 मरीज पटाखों/कार्बाइड गन से आंखों की चोट के साथ पहुंचे
– इनमें 22 मामले सीधे कार्बाइड गन से जुड़े पाए गए
– 80% घायल स्वयं गन चला रहे थे, जबकि 20% पास खड़े दर्शक थे
संस्थान के वरिष्ठ चिकित्सकों के मुताबिक कुछ बच्चों की सर्जरी जनवरी के दूसरे सप्ताह में प्रस्तावित है।
डॉक्टरों की चेतावनी: स्थायी अंधेपन का जोखिम
नेत्र रोग विशेषज्ञों का कहना है कि कार्बाइड के कण आंख की पारदर्शी झिल्ली को इस हद तक नुकसान पहुंचाते हैं कि सामान्य इलाज से सुधार संभव नहीं रहता। कुछ बच्चों में पहले ही सर्जरी की जा चुकी है, जबकि अन्य मामलों में नेत्र प्रत्यारोपण की आशंका जताई गई है।
नियमन पर सवाल: बिक्री और निर्माण पर कोई निगरानी नहीं
सबसे गंभीर पहलू यह है कि न तो इस तरह की गन के निर्माण पर कोई स्पष्ट निगरानी है और न ही छोटे दुकानदारों व ठेलों पर इसकी बिक्री को रोकने की प्रभावी व्यवस्था। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मामला केवल दुर्घटना नहीं, बल्कि रेगुलेटरी फेल्योर का उदाहरण है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया: अखिलेश यादव ने की कार्रवाई की मांगी
इस पूरे मामले पर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि- “खतरनाक केमिकल और मैकेनिकल वस्तुओं को बिना जांच-परख बनाने और बेचने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। सरकार की पहली जिम्मेदारी नागरिकों की सुरक्षा है।”
उन्होंने मांग की कि-
a. पीड़ित बच्चों को उच्च स्तरीय मुफ्त इलाज मिले
b. प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिया जाए
c. दोषी आयातकों, स्थानीय उत्पादकों और अनुमति देने वाले अधिकारियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई हो
शोध और आगे की कार्रवाई
बीएचयू ने इस विषय पर वैज्ञानिक अध्ययन शुरू किया है, जिसे राष्ट्रीय स्तर के नेत्र चोट सम्मेलन में प्रस्तुत किया जाएगा। भारतीय नेत्र संगठन (IOS) ने भी विशेषज्ञों की एक टीम बनाकर ऐसे मामलों के राष्ट्रीय पैटर्न का अध्ययन शुरू किया है।
निष्कर्ष
कार्बाइड गन से जुड़ी घटनाएं यह संकेत देती हैं कि त्योहारों के दौरान बच्चों की सुरक्षा केवल अभिभावकों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रशासनिक निगरानी और सख्त नियमन की भी आवश्यकता है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या आने वाले वर्षों में और गंभीर रूप ले सकती है।
