सहारनपुर जिले के देहात कोतवाली क्षेत्र के गांव शेखपुरा कदीम के पांच मजदूरों की हरियाणा के कुरुक्षेत्र में दर्दनाक मौत हो गई। सभी की मौत का कारण बंद कमरे में अंगीठी जलाने से दम घुटना बताया गया है। हादसे के बाद गांव में मातम छाया हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
जानकारी के मुताबिक, गांव शेखपुरा कदीम निवासी ठेकेदार नूर (26) सोनू (30), मदनपाल (42), रोशनपाल (46) और रामकुमार (45) के साथ 21 दिसंबर को काम के सिलसिले में कुरुक्षेत्र गया था। सभी लोग पेशे से पेंटर थे और कुरुक्षेत्र के पिपली रोड स्थित स्टर्लिंग रिसॉर्ट होटल में रंग-रोगन का काम कर रहे थे। काम के दौरान सभी मजदूर होटल परिसर में बने एक कमरे में ही ठहरे हुए थे।
सोमवार रात खाना खाने के बाद ठंड से बचने के लिए उन्होंने कमरे में अंगीठी जला ली और सो गए। मंगलवार सुबह जब काफी देर तक कोई बाहर नहीं निकला तो होटल के सफाईकर्मी को शक हुआ। उसने दरवाजा खटखटाया और खिड़की से झांककर देखा, लेकिन अंदर कोई हलचल नहीं दिखी। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दरवाजा तोड़ा, तो कमरे के अंदर पांचों मजदूर मृत मिले।
पुलिस ने सभी शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस की जांच में सभी की मौत दम घुटने से आई है।। इसके बाद पुलिस ने मृतकों के परिजनों को सूचना दी।
रिश्तों में जुड़े थे मृतक
हादसे में जान गंवाने वाले नूर और सोनू सगे भाई थे। नूर की शादी करीब पांच महीने पहले हुई थी, जबकि सोनू की शादी लगभग ढाई-तीन साल पहले हुई थी। दोनों की कोई संतान नहीं थी। परिवार में माता-पिता और दो बड़ी बहनें हैं, जिनकी शादी हो चुकी है।
रोशनपाल और रामकुमार आपस में जीजा-साले थे। रोशनपाल के तीन बच्चे हैं, जिनमें दो बेटियां और एक बेटा शामिल है। बड़ी बेटी की शादी हाल ही में हुई थी। वहीं रामकुमार मूल रूप से तीतरों के गांव महमूदपुर का रहने वाला था और वर्तमान में सदर बाजार थाना क्षेत्र के गलीरा रोड के पास रह रहा था। उसके भी दो बेटियां और एक बेटा हैं।
गांव शेखपुरा कदीम निवासी मदनपाल के भी दो बेटियां और एक बेटा है। परिजनों के अनुसार, मदनपाल की हादसे से एक रात पहले ही घरवालों से फोन पर बात हुई थी और वह जल्द गांव लौटने की बात कह रहा था।
गांव में शोक का माहौल
पांचों मजदूरों की मौत की खबर मिलते ही शेखपुरा कदीम गांव में शोक की लहर दौड़ गई। मंगलवार को मृतकों के घरों पर लोगों का जमावड़ा लगा रहा। हर कोई इस हादसे से स्तब्ध है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता देने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। यह घटना एक बार फिर बंद कमरों में अंगीठी या कोयले के इस्तेमाल से होने वाले खतरों को उजागर करती है, जिसने एक ही गांव के पांच परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है।
