लखनऊ की राजधानी क्षेत्र के जलालपुर स्थित दोदाखेड़ा गांव से बुधवार को एक हृदयविदारक घटना सामने आई, जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। पालतू कुत्ते की लंबे समय से चली आ रही बीमारी से मानसिक तनाव में आईं दो सगी बहनों ने फिनायल पीकर आत्महत्या कर ली। अस्पताल पहुंचते-पहुंचते एक बहन की मौत हो गई, जबकि दूसरी ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। हंसते-खेलते घर से एक साथ उठी दो अर्थियों ने हर आंख नम कर दी।
पारा थाना क्षेत्र के दोदाखेड़ा गांव में रहने वाली 24 वर्षीय राधा सिंह और 22 वर्षीय जिया सिंह दोनों ग्रेजुएशन पास थीं और अपने परिवार के साथ रहती थीं। दोनों बहनों ने घर में जर्मन शेफर्ड नस्ल का कुत्ता पाल रखा था, जिसका नाम टोनी था। टोनी पिछले करीब एक महीने से बीमार चल रहा था। परिवार लगातार उसका इलाज करा रहा था, लेकिन उसकी हालत में कोई खास सुधार नहीं हो रहा था। इसी बात को लेकर दोनों बहनें लगातार तनाव और अवसाद में थीं।
दुकान से लौटने के बाद बिगड़ी हालत
बुधवार को मां गुलाबा देवी ने दोनों बेटियों को पास की दुकान से घरेलू सामान लेने भेजा था। दुकान से लौटने के कुछ ही देर बाद दोनों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। वे कराहती हुई मां के पास पहुंचीं और बताया कि उन्होंने फिनायल पी लिया है। यह सुनते ही परिवार में हड़कंप मच गया।
आसपास के लोगों की मदद से दोनों को आनन-फानन में रानी लक्ष्मीबाई अस्पताल ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उन्हें ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया, लेकिन रास्ते में ही राधा की मौत हो गई। ट्रॉमा सेंटर में इलाज के दौरान जिया ने भी दम तोड़ दिया। पुलिस ने दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है।
टोनी से था बेहद लगाव
परिजनों और पड़ोसियों के अनुसार, दोनों बहनें अपने पालतू कुत्ते टोनी से बेहद प्यार करती थीं। अगर टोनी खाना नहीं खाता था तो वे भी खाना छोड़ देती थीं। छोटी बहन जिया की मानसिक स्थिति पहले से पूरी तरह ठीक नहीं थी और वह जल्दी अवसाद में चली जाती थी। कुत्ते की लगातार बिगड़ती हालत ने दोनों बहनों को अंदर से तोड़ दिया था।
परिवार पहले से ही कठिन परिस्थितियों से गुजर रहा था। पिता कैलाश सिंह रुई धुनाई का काम करते थे, लेकिन पिछले छह महीने से वह भी बीमार होकर बिस्तर पर हैं। सात साल पहले परिवार एक बेटे को ब्रेन हेमरेज में खो चुका है। अब दो बेटियों की एक साथ मौत ने माता-पिता को गहरे सदमे में डाल दिया है।
आखिरी इच्छा: ‘टोनी को मत भगाना’
मां गुलाबा देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। वह बार-बार बेटियों की आखिरी बात दोहरा रही हैं- “हमारे मरने के बाद टोनी को घर से मत भगाना, उसका इलाज करवाते रहना।” यह वाक्य अब मां के लिए बेटियों की आखिरी निशानी बन गया है। पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, हालांकि सभी पहलुओं से जांच की जा रही है।
यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति समाज की जिम्मेदारी की भी याद दिलाती है। भावनात्मक लगाव, अवसाद और पारिवारिक दबाव कई बार इंसान को ऐसे फैसले तक पहुंचा देते हैं, जहां से लौटना संभव नहीं होता। जरूरत है कि मानसिक तनाव या अवसाद की स्थिति में समय रहते परिवार, मित्र या विशेषज्ञों से बात की जाए। जीवन अनमोल है और हर समस्या का समाधान संवाद और सहयोग से संभव है।
