लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) से जुड़ा एक गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। यहां पैथोलॉजी विभाग के रेजिडेंट डॉक्टर रमीज मलिक पर यौन शोषण, जबरन धर्म परिवर्तन का दबाव, धोखाधड़ी और धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। मामले में चौक थाने में एफआईआर दर्ज की जा चुकी है और पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी है।
कुंवारा बताने वाला रेजिडेंट, हकीकत में दो शादियां
आरोप है कि रेजिडेंट डॉक्टर रमीज मलिक ने खुद को अविवाहित बताकर अपनी महिला सहकर्मी को प्रेमजाल में फंसाया। जबकि जांच और पीड़िता के बयान के अनुसार, रमीज की एक नहीं बल्कि दो शादियां हो चुकी थीं। दूसरी शादी उसने एक हिंदू युवती का धर्म परिवर्तन कराकर फरवरी 2025 में की थी। इसके बावजूद वह खुद को कुंवारा बताता रहा।
शादी का झांसा, फिर शोषण और गर्भपात
पीड़िता के अनुसार, वह किराये के मकान में रहती थी और कुछ माह पहले रमीज से उसकी दोस्ती हुई। आरोपी ने खुद को उत्तराखंड के खटीमा में रहने वाला और मूल रूप से सहारनपुर निवासी बताया। अगस्त महीने में उसने शादी का भरोसा देकर पीड़िता के साथ शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद वह लगातार उसके कमरे और अपने किराये के मकान (ठाकुरगंज स्थित शीश महल) पर बुलाकर संबंध बनाता रहा। सितंबर में जब पीड़िता ने गर्भवती होने की जानकारी दी, तो आरोपी ने दवा देकर जबरन गर्भपात करा दिया।
धर्म परिवर्तन का दबाव और धमकियां
एफआईआर के मुताबिक, सितंबर में पीड़िता की मुलाकात ठाकुरगंज इलाके में एक युवती से हुई, जिसने खुद को रमीज की पत्नी बताया। उसने बताया कि रमीज ने उसका धर्म परिवर्तन कराकर उससे निकाह किया है। इस खुलासे के बाद भी आरोपी ने पीड़िता से शादी का भरोसा बनाए रखा।
अक्टूबर में जब पीड़िता ने शादी की बात दोहराई, तो रमीज ने उस पर धर्म बदलने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। इंकार करने पर आरोपी ने निजी फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी दी और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया।
मानसिक उत्पीड़न से टूटी पीड़िता, आत्महत्या का प्रयास
लगातार दबाव, धमकियों और धोखे से पीड़िता गंभीर मानसिक तनाव में आ गई। 17 दिसंबर को उसने आत्महत्या के इरादे से दवाओं की ओवरडोज ले ली। हालत बिगड़ने पर उसे ट्रॉमा सेंटर की आईसीयू में भर्ती कराया गया। होश में आने के बाद उसने अपने पिता को पूरी आपबीती बताई और 19 दिसंबर को केजीएमयू प्रशासन से लिखित शिकायत की।
महिला आयोग और विशाखा समिति की कार्रवाई
पीड़िता ने राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव के साथ प्रेसवार्ता कर पूरे मामले को सार्वजनिक किया। इसके बाद आयोग ने संज्ञान लेते हुए केजीएमयू प्रशासन और पुलिस को कार्रवाई के निर्देश दिए। विश्वविद्यालय स्तर पर मामले को विशाखा समिति को सौंपा गया।
जांच के दौरान आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर ने खुद को कुंवारा बताया, लेकिन समिति ने उससे इसके सबूत मांगे। जांच में आरोपी को दोषी पाए जाने पर केजीएमयू प्रशासन ने उसे निलंबित कर दिया। छात्रावास, कक्षाओं, लैब और परिसर में प्रवेश पर भी रोक लगा दी गई है।
एफआईआर दर्ज, पुलिस तलाश में
चौक थाने में रमीज मलिक के खिलाफ यौन शोषण, धर्म परिवर्तन समेत अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। एसीपी चौक राजकुमार सिंह के अनुसार, आरोपी की गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित की गई हैं और जल्द उसे पकड़ लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री तक पहुंचा मामला, ABVP का प्रदर्शन
मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचा, जिन्होंने पीड़िता से फोन पर बात कर न्याय का भरोसा दिलाया। वहीं, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं ने केजीएमयू परिसर में प्रदर्शन कर आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की और कुलपति को ज्ञापन सौंपा।
जांच का दायरा बढ़ा, गिरोह की आशंका
पीड़िता और महिला आयोग की ओर से आशंका जताई गई है कि यह मामला केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि संगठित तरीके से धर्मांतरण कराने वाले गिरोह से भी जुड़ा हो सकता है। ऐसे में पुलिस और प्रशासन द्वारा गहन जांच की जा रही है।
यह मामला न केवल एक महिला डॉक्टर के साथ हुए कथित अन्याय को उजागर करता है, बल्कि मेडिकल संस्थानों में कार्यस्थल सुरक्षा, विश्वास और कानून के सख्त पालन की जरूरत को भी रेखांकित करता है।
