होर्मुज़ जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत सरकार ने बुधवार को राष्ट्रीय मीडिया केंद्र में एक अंतर-मंत्रालयी प्रेस ब्रीफिंग आयोजित की। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, बंदरगाह, जहाज़रानी एवं जलमार्ग मंत्रालय और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने मीडिया को देश की तैयारियों की पूरी जानकारी दी।
यह ब्रीफिंग इस लिहाज से अहम है क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरत का बड़ा हिस्सा उसी रास्ते से मंगाता है जो इस वक्त दुनिया का सबसे तनावग्रस्त समुद्री मार्ग बन चुका है। साथ ही खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं जिनकी सुरक्षा भी सरकार की प्राथमिकता है। सरकार ने स्पष्ट किया कि घबराने की नहीं बल्कि सतर्क रहने की ज़रूरत है।
कच्चे तेल की स्थिति – क्या भारत की सप्लाई सुरक्षित है?
पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारी ने साफ कहा कि भारत की कच्चे तेल की आपूर्ति फिलहाल सुरक्षित है। देश की रोज़ाना की खपत करीब 55 लाख बैरल है और सरकार ने विविध स्रोतों से उतना तेल सुनिश्चित कर लिया है जो सामान्य परिस्थितियों में होर्मुज़ मार्ग से आता था। यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत अब करीब 40 देशों से कच्चा तेल खरीदता है। इस विविधीकरण का नतीजा यह है कि अब 70 प्रतिशत कच्चा तेल होर्मुज़ से बाहर के रास्तों से आ रहा है जबकि पहले यह आंकड़ा 55 प्रतिशत था। यानी पिछले कुछ वर्षों में भारत ने चुपचाप अपनी ऊर्जा निर्भरता को एक रास्ते से हटाकर कई रास्तों पर फैला दिया। इसका फायदा आज साफ दिख रहा है।
सरकार का कहना है कि देश भर की रिफाइनरियां बहुत ऊंचे स्तर पर काम कर रही हैं, कुछ तो 100 प्रतिशत से भी अधिक क्षमता पर चल रही हैं। यानी जितना तेल आ रहा है उसे पूरी क्षमता से प्रोसेस किया जा रहा है ताकि देश में पेट्रोल और डीज़ल की कोई कमी न हो।
प्राकृतिक गैस – कहां है असल दबाव और कैसे हो रहा है प्रबंधन?
प्राकृतिक गैस की स्थिति थोड़ी पेचीदा है और यहीं असल दबाव दिख रहा है। देश की कुल प्राकृतिक गैस खपत 189 MMSCMD है जिसमें से 97.5 MMSCMD घरेलू उत्पादन से आती है। लेकिन मौजूदा संकट की वजह से करीब 47.4 MMSCMD की सप्लाई बाधित हुई है जिसे Force Majeure यानी अप्रत्याशित परिस्थिति घोषित किया गया है।
सरकार ने 9 मार्च 2026 को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत नेचुरल गैस कंट्रोल ऑर्डर जारी किया है। इस आदेश के ज़रिए यह तय किया गया है कि गैस पहले किसे मिलेगी। घरों तक PNG सप्लाई और वाहनों के लिए CNG को 100 प्रतिशत आपूर्ति मिलती रहेगी यानी इसमें कोई कटौती नहीं होगी। चाय उद्योग और अन्य औद्योगिक उपभोक्ताओं को पिछले छह महीनों की औसत खपत का करीब 80 प्रतिशत मिलेगा। उर्वरक संयंत्रों को 70 प्रतिशत और रिफाइनरियों एवं पेट्रोकेमिकल इकाइयों को करीब 35 प्रतिशत की कटौती से काम चलाना होगा।
सरकार नए स्रोतों से LNG कार्गो की व्यवस्था कर रही है। फ़िलहाल यह प्राथमिकता आधारित आवंटन इसलिए किया गया है ताकि आम आदमी की रसोई और यातायात पर कोई असर न पड़े।
एलपीजी संकट की असलियत – घबराहट कहाँ तक जायज़?
एलपीजी को लेकर देश भर में जो बेचैनी है उसकी एक ठोस वजह है। भारत अपनी कुल LPG खपत का करीब 60 प्रतिशत आयात करता है और उस आयात का 90 प्रतिशत होर्मुज़ से होकर आता है। यानी यह वो जगह है जहां मौजूदा संकट का सबसे सीधा असर पड़ा है।
सरकार ने 8 मार्च 2026 को ही एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया जिसमें रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल संयंत्रों को निर्देश दिया गया कि वे प्रोपेन, ब्यूटेन और अन्य धाराओं को LPG पूल में मोड़ें। इस कदम से घरेलू LPG उत्पादन में करीब 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और यह पूरा उत्पादन घरेलू उपभोक्ताओं को दिया जा रहा है।
दिल्ली में घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत 60 रुपये की हालिया बढ़ोतरी के बाद 913 रुपये है। PMUY यानी उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए यह कीमत 613 रुपये ही है। सरकार ने तेल विपणन कंपनियों को LPG अंडर-रिकवरी के लिए 30,000 करोड़ रुपये की भरपाई भी मंज़ूर की है। मैदानी स्तर पर पैनिक बुकिंग और जमाखोरी की खबरें आ रही हैं लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया कि घरेलू LPG की सामान्य डिलीवरी का चक्र करीब ढाई दिन का है और लोगों से अनुरोध है कि वे जल्दबाज़ी में बुकिंग न करें।
समुद्री सुरक्षा – खाड़ी में भारतीय जहाज़ और नाविक कहां हैं?
बंदरगाह एवं जहाज़रानी मंत्रालय ने बताया कि इस वक्त फारस की खाड़ी में 28 भारतीय ध्वजवाहक जहाज़ काम कर रहे हैं। इनमें से 24 जहाज़ होर्मुज़ जलडमरूमध्य के पश्चिम में हैं जिनमें 677 भारतीय नाविक सवार हैं। बाकी 4 जहाज़ होर्मुज़ के पूर्व में हैं जिनमें 101 भारतीय नाविक हैं। इन सभी की सुरक्षा पर सतत निगरानी रखी जा रही है।
सरकार ने 28 फरवरी 2026 से ही मंत्रालय और डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग में 24 घंटे का कंट्रोल रूम चालू कर दिया था। भारतीय ध्वजवाहक जहाज़ों और नाविकों को बढ़े हुए सुरक्षा उपाय अपनाने और रिपोर्टिंग प्रोटोकॉल का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। शिप मैनेजर, भर्ती एजेंसियां और भारतीय दूतावास मिलकर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि किसी भी नाविक को मदद की ज़रूरत पड़े तो वह तुरंत मिले।
देश के सभी प्रमुख बंदरगाहों पर कामकाज सामान्य है और निर्यातकों को होने वाली परेशानियों को कम करने के लिए बंदरगाहों को विशेष सहायता देने के निर्देश दिए गए हैं। यह इसलिए ज़रूरी है क्योंकि जब समुद्री रास्ते तनावग्रस्त हों तो बंदरगाहों पर व्यापार की निरंतरता बनाए रखना और भी अहम हो जाता है।
विदेश में बसे भारतीय – एक करोड़ लोगों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित हो रही है?
विदेश मंत्रालय ने बताया कि खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं और उनकी सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है। प्रधानमंत्री ने यूएई, कतर, सऊदी अरब, ओमान, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन और इज़रायल के नेताओं से सीधे बातचीत की है। विदेश मंत्री जयशंकर का इन देशों के अपने समकक्षों के साथ-साथ ईरान से भी नियमित संपर्क बना हुआ है।
क्षेत्र में भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास लगातार सलाहकारी जारी कर रहे हैं और समुदाय के सदस्यों से सीधे जुड़े हुए हैं। जो भारतीय फंसे हुए थे उन्हें मस्कट, रियाद और जेद्दा जैसे स्थानों से वाणिज्यिक उड़ानों के ज़रिए वापस लाने में मदद की जा रही है। ईरान में अभी करीब 9,000 भारतीय हैं। वहां के छात्र और तीर्थयात्री तेहरान से सुरक्षित शहरों में पहुंचाए जा चुके हैं और आर्मेनिया तथा अज़रबैजान के ज़रिए स्वदेश वापसी के रास्ते भी खोले जा रहे हैं।
दुखद यह है कि समुद्री हमलों में दो भारतीय नागरिकों की जान जा चुकी है और एक अभी भी लापता है। सरकार ने परिजनों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की हैं और घायल भारतीयों की मदद के लिए मिशन सक्रिय हैं।
FAQs
क्या भारत में पेट्रोल-डीज़ल की किल्लत होगी?
सरकार के अनुसार नहीं। रिफाइनरियां पूरी क्षमता पर चल रही हैं और कच्चे तेल की आपूर्ति 40 देशों से विविध रास्तों से सुनिश्चित की जा रही है।
LPG इतनी महंगी और दुर्लभ क्यों हो गई?
भारत अपनी LPG आपूर्ति का 60 प्रतिशत आयात करता है जिसका 90 प्रतिशत होर्मुज़ से आता था। इस रास्ते में बाधा आने से आपूर्ति प्रभावित हुई। फिलहाल सरकार ने घरेलू उत्पादन 25 प्रतिशत बढ़ाया है और जमाखोरी रोकने के उपाय किए जा रहे हैं।
PMUY यानी उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को कितना देना होगा?
उनके लिए सिलेंडर की कीमत 613 रुपये है। हालिया 60 रुपये की बढ़ोतरी का असर उन पर 80 पैसे प्रति दिन से भी कम है।
खाड़ी में बसे भारतीयों को क्या करना चाहिए?
विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावासों के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल फॉलो करें। किसी भी मदद के लिए MEA के कंट्रोल रूम से संपर्क करें।
क्या CNG और PNG पर कोई असर पड़ेगा?
नहीं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू PNG और वाहनों के लिए CNG को 100 प्रतिशत आपूर्ति जारी रहेगी।
