बदायूँ के मूसाझाग थाना क्षेत्र के सैंजनी गाँव में स्थित हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट में हुए दोहरे हत्याकांड ने पूरे उत्तर प्रदेश की पुलिस व्यवस्था के सामने एक ऐसा आईना रख दिया है जिसमें उसकी शक्ल देखते नहीं बनती। यह हत्याकांड न तो अचानक था, न अप्रत्याशित – यह एक सिलसिलेवार लापरवाही का अंजाम था जो 4 फरवरी से 12 मार्च के बीच 38 दिनों में धीरे-धीरे लिखा जा रहा था और पुलिस से लेकर एसएसपी तक सब पढ़ रहे थे, समझ रहे थे और चुप थे।
वो दिन जब सुधीर गुप्ता ने VRS माँगी
HPCL के उप महाप्रबंधक सुधीर गुप्ता 58 साल की उम्र में उस मोड़ पर थे जब आदमी पीछे मुड़कर देखता है और आगे की ज़िंदगी की तैयारी करता है। उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की अर्ज़ी दे दी थी और 31 मार्च को उन्हें कार्यमुक्त होना था। लेकिन यह VRS किसी थकान से नहीं, डर से आई थी। प्लांट के पूर्व वेंडर अजय प्रताप सिंह उर्फ रामू की धमकियाँ इतनी बढ़ चुकी थीं कि सुधीर गुप्ता को लगने लगा था कि नौकरी छोड़ देना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है। उन्होंने पुलिस पर भरोसा किया था – और पुलिस ने उस भरोसे को 38 दिनों तक धूल में मिलाए रखा।
डिप्टी मैनेजर हर्षित मिश्रा की उम्र महज 34 साल थी। उन्होंने न्याय के लिए पहल की थी। 4 फरवरी को थाना मूसाझाग में बाकायदा तहरीर दी, एफआईआर दर्ज कराई, सुरक्षा माँगी। इसके बाद वह एसपी के दफ्तर गए, डीएम से मिले, यहाँ तक कि स्थानीय विधायक के पास भी पहुँचे। 12 मार्च को मीटिंग रूम में उन्हें गोली लगी और वह भी बचाए नहीं जा सके।
जब सीओ ने लिखा और एसएसपी ने नहीं पढ़ा
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि सीओ उझानी डॉ. देवेंद्र कुमार पचौरी ने 2 मार्च को ही एसएसपी डॉ. ब्रजेश सिंह को लिखित रिपोर्ट सौंप दी थी। रिपोर्ट में साफ था – थाना प्रभारी निरीक्षक अजय कुमार और विवेचक एसआई धर्मेंद्र कुमार मामले की जांच में घोर लापरवाही बरत रहे हैं, इन्हें तत्काल हटाया जाए। रिपोर्ट एसएसपी की मेज़ तक पहुँची। एसएसपी ने उस पर क्या किया? कुछ नहीं।
विवेचक की करतूत इससे भी आगे थी। 4 फरवरी से 2 मार्च के बीच पूरे 26 दिनों में उसने सिर्फ चार पर्चे काटे थे। चार्जशीट अदालत में दाखिल नहीं की गई। आरोपी की जमानत के लिए प्रपत्र भरवाकर फ़ाइल बंद कर दी गई – जैसे मामला सुलझ गया हो।
अजय प्रताप: रसूख का वह चेहरा जो पुलिस को नहीं दिखता था
अजय प्रताप सिंह मूसाझाग इलाके में कोई साधारण आदमी नहीं था। उसके परिवार की पकड़ इलाके की राजनीति और प्रशासन दोनों में थी – प्रधानी, कोटेदारी, जिला पंचायत सदस्यता, यह सब एक ही छत के नीचे थे। HPCL के CBG प्लांट में पराली आपूर्ति का उसके पास ठेका था। जब प्लांट प्रबंधन ने उसे ब्लैकलिस्ट कर ठेका रद्द किया तो उसने जो रास्ता चुना वह धमकी का था, हिंसा का था। और उस रास्ते पर चलने से पहले उसे यह भरोसा था – शायद अनुभव से मिला भरोसा – कि पुलिस कुछ नहीं करेगी।
12 मार्च को दोपहर करीब एक बजे वह छह साथियों के साथ बोलेरो में HPCL प्लांट के गेट पर पहुँचा। शिफ्ट बदलने का समय था। गेट पर जाँच ढीली थी। वह हथियार समेत अंदर निकल गया और मीटिंग रूम में घुसकर उसने दोनों अधिकारियों पर ताबड़तोड़ गोलियाँ चलाईं।
एनकाउंटर: गोली दोनों पैरों में लगी
हत्याकांड के बाद अजय प्रताप ने थाने में समर्पण किया। 13 मार्च को पुलिस उसे मुडसैना गाँव के जंगल में कथित तौर पर मुठभेड़ में इस्तेमाल हुए तमंचे की बरामदगी के लिए ले गई। वहाँ उसने पुलिस टीम पर फायरिंग की – जवाबी कार्रवाई में उसके दोनों पैरों में गोलियाँ लगीं। इस मुठभेड़ में सिपाही ओमबीर सिंह के बाएँ हाथ में भी गोली लगी। अजय प्रताप अभी ज़िंदा है, अस्पताल में है।
मुख्यमंत्री की नज़र पड़ी, ममीरा चढ़ा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नज़र-ए-इनायत जैसे ही इस मामले पर पड़ी, पूरे अमले को एक साथ वह “टूंडला वाला ममीरा” चढ़ गया जो 4 फरवरी को शिकायत के बाद नहीं चढ़ा था, 2 मार्च को सीओ की रिपोर्ट के बाद नहीं चढ़ा था। एसएसपी डॉ. ब्रजेश सिंह को हटाकर डीजीपी मुख्यालय की लॉजिस्टिक शाखा भेज दिया गया। उनकी जगह कासगंज की एसपी IPS अंकिता शर्मा को बदायूँ का नया एसएसपी बनाया गया। सीओ उझानी डॉ. देवेंद्र कुमार पचौरी का भी पत्ता साफ हुआ – DGP ऑफ़िस से अटैच कर दिए गए और लखनऊ-112 के राहुल पांडेय को उनकी जगह भेजा गया। थाना प्रभारी निरीक्षक अजय कुमार और हल्का प्रभारी दरोगा निलंबित हुए।
आरोपी की माँ किरन देवी के नाम राशन की दुकान कोटे में गड़बड़ी के आरोपों में सस्पेंड कर दी गई। SDM ने जाँच में पाया है कि अजय प्रताप की छह दुकानें PWD की ज़मीन पर खड़ी हैं – बुलडोज़र की कार्रवाई प्रस्तावित है। बरेली मंडलायुक्त की अध्यक्षता में SIT गठित कर दी गई है और CBG प्लांट पर पुलिस चौकी स्थापित कर दी गई है।
जो सवाल बचेगा
यह सब कार्रवाइयाँ हो रही हैं – हों भी। लेकिन जो सवाल हवा में लटका रहेगा, वह यह है कि यदि यही ममीरा 4 फरवरी को चढ़ जाता, जब लिखित शिकायत के बाद विवेचक सचमुच विवेचना करता, या फिर सीओ की रिपोर्ट पर एसएसपी उसी दिन कार्रवाई कर देते, तो क्या आज सुधीर गुप्ता 31 मार्च का इंतज़ार नहीं कर रहे होते? क्या हर्षित मिश्रा अपने 34 साल की उम्र में किसी नई सुबह की शुरुआत नहीं कर रहे होते?
अफ़सरशाही की आँखें खुलने की कीमत इस बार दो इंसानी जानें थीं। SIT जाँचेगी, बुलडोज़र भी चलेगा – लेकिन क्या व्यवस्था में टूट चुका परिवारों का विश्वास कभी पुनः प्राप्त किया जा सकेगा? उन परिवारों को तो हमेशा यही महसूस होगा कि व्यवस्था ने उनसे उनका सब कुछ छीन लिया।
📌 मुख्य तथ्य एक नजर में
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| घटना तिथि | 12 मार्च 2026 |
| स्थान | HPCL CBG प्लांट, सैंजनी, मूसाझाग, बदायूँ |
| मृतक | DGM सुधीर गुप्ता (58) व डिप्टी मैनेजर हर्षित मिश्रा (34) |
| आरोपी | अजय प्रताप सिंह उर्फ रामू (34), पूर्व वेंडर |
| पहली FIR | 4 फरवरी 2026 |
| एनकाउंटर | 13 मार्च 2026 — दोनों पैरों में गोली |
| कार्रवाई | थानेदार-दरोगा निलंबित, SSP व CO हटाए, SIT गठित |
| नई SSP | IPS अंकिता शर्मा |
