लखनऊ, 18 जनवरी 2026: भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सुर्या कांत ने शनिवार को उत्तर प्रदेश के छह जिलों में एकीकृत न्यायिक परिसरों की नींव रखी और भूमि पूजन किया। यह कार्यक्रम चंदौली जिले में आयोजित किया गया, जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद थे। इन परिसरों की कुल अनुमानित लागत 1,500 करोड़ रुपये है, और ये न्याय मांगने वालों तथा वकीलों की जरूरतों को कम से कम अगले 50 वर्षों तक पूरा करने के लिए डिजाइन किए गए हैं।
कार्यक्रम का विवरण और शामिल जिले
यह ऐतिहासिक कार्यक्रम चंदौली में हुआ, जहां सीजेआई ने छह जिलों – चंदौली, महोबा, अमेठी, शामली, हाथरस और औरैया के लिए एक साथ निर्माण कार्य की नींव रखी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि राज्य सरकार ने उन 10 जिलों में एकीकृत न्यायिक परिसरों के निर्माण की मंजूरी दी है, जहां पहले जिला अदालतें नहीं बन पाई थीं। इनमें से छह जिलों में काम शुरू हो चुका है, जबकि बाकी चार के लिए औपचारिकताएं जल्द पूरी की जाएंगी।
चंदौली परिसर की लागत 236 करोड़ रुपये है, जिसमें 37 कोर्टरूम, वकीलों के चैंबर, न्यायिक अधिकारियों के आवास और जिला जज के लिए आवास शामिल हैं। इसका निर्माण अप्रैल 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है। निर्माण कार्य एलएंडटी कंपनी द्वारा किया जाएगा।
सीजेआई सुर्या कांत के बयान
सीजेआई सुर्या कांत ने कहा, “एक बार ये परिसर बन जाएंगे, तो उत्तर प्रदेश पूरे भारत के लिए एक उदाहरण बनेगा और राष्ट्रीय बेंचमार्क स्थापित करेगा।” उन्होंने जोर देकर कहा कि वे अन्य राज्यों में उत्तर प्रदेश के मॉडल का उदाहरण देंगे और राज्य सरकारों तथा हाई कोर्ट्स को ऐसी सुविधाएं प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। सीजेआई ने महिला वकीलों के लिए हर जिला अदालत में समर्पित कमरे की वकालत की और परिसरों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शामिल करने का सुझाव दिया, खासकर बुजुर्ग मुकदमेबाजों की सुविधा के लिए। उन्होंने योग केंद्र और पार्क की सराहना की और प्रार्थना की कि ये परिसर न्याय के मंदिर बनें, जहां न्यायिक अधिकारी करुणा और मानवीय मूल्यों के साथ न्याय करेंगे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की टिप्पणियां
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकतंत्र के लिए मजबूत न्यायपालिका की महत्वपूर्णता पर जोर दिया और कहा कि गुणवत्ता वाली बुनियादी ढांचा न्याय को सुलभ और कुशल बनाने के लिए आवश्यक है। उन्होंने बताया की पहले चरण के लिए छह जिलों में धन जारी कर दिया गया है, डिजाइन मंजूर हो चुके हैं और निर्माण तेजी से किया जाएगा। परिसरों में आधुनिक वकील चैंबर, न्यायिक अधिकारियों के आवास, खेल सुविधाएं, पर्याप्त पार्किंग और कैंटीन सेवाएं शामिल होंगी। उन्होंने इस पहल को ऐतिहासिक बताया, जो भारत के न्यायिक इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा।
परिसरों के लाभ और सुविधाएं
ये एकीकृत न्यायिक परिसर कई अदालतों, न्यायिक कार्यालयों और आवश्यक कानूनी सेवाओं को एक छत के नीचे समाहित करेंगे, जिससे मुकदमेबाजों और वकीलों के लिए लॉजिस्टिकल चुनौतियां कम होंगी और न्यायिक कार्यवाही में दक्षता बढ़ेगी। विशेष रूप से उन जिलों में जहां बुनियादी ढांचा सीमित है, ये परिसर न्याय वितरण प्रणाली में सुधार लाएंगे। सुविधाओं में योग केंद्र, स्वास्थ्य सेवाएं, पार्क और महिला वकीलों के लिए समर्पित स्थान शामिल हैं।
उपस्थित प्रमुख व्यक्ति
कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश राजेश बिंदल, विक्रम नाथ, पंकज मिथल, मनोज मिश्रा और इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली मौजूद थे। वरिष्ठ हाई कोर्ट जज महेश चंद्र त्रिपाठी और अन्य न्यायिक अधिकारी भी उपस्थित रहे।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं
सोशल मीडिया पर इस घटना की सराहना हो रही है। कई यूजर्स ने इसे ‘उत्तर प्रदेश मॉडल’ के रूप में प्रशंसा की और विपक्षी पार्टियों के लिए ‘बर्नोल मोमेंट’ बताया। सीजेआई के बयान को राष्ट्रीय स्तर पर न्यायिक बुनियादी ढांचे के लिए एक प्रेरणा के रूप में देखा जा रहा है।
निष्कर्ष: न्यायिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम
यह पहल उत्तर प्रदेश में न्यायिक सुधारों और बुनियादी ढांचे के विकास की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जो न्याय वितरण प्रणाली में जनता का विश्वास मजबूत करेगी और समयबद्ध तथा प्रभावी न्याय सुनिश्चित करेगी। अन्य राज्यों के लिए यह एक मिसाल बनेगा, जैसा कि सीजेआई ने कहा।
