नई दिल्ली, 15 जनवरी 2026: आज मकर संक्रांति का त्योहार पूरे देश में धूमधाम से मनाया जा रहा है। सूरज की उत्तरायण यात्रा के इस मौके पर लोग पतंग उड़ाते हैं, तिल-गुड़ खाते हैं और गौ-सेवा करते हैं। इसी बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी परंपरा को जारी रखते हुए दिल्ली स्थित अपने आवास पर पुंगनूर नस्ल की गायों को चारा खिलाया और उनके साथ खेलते हुए एक प्यारा सा वीडियो शेयर किया। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, और लोग इसे देखकर कह रहे हैं कि पीएम मोदी को जब भी फुर्सत मिलती है, वे इन छोटी-सी गायों के साथ समय बिताते हैं। यह नस्ल न सिर्फ दुर्लभ है, बल्कि भारत की समृद्ध गौ-परंपरा का प्रतीक भी है। आइए, इस खास नस्ल के बारे में विस्तार से जानते हैं-
पुंगनूर गाय आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले से आती है, जहां इनके नाम का यानी पुंगनूर करके एक कस्बा है। पुंगनूर दुनिया की सबसे छोटी गायों की नस्लों में से एक है। औसत ऊंचाई 70 से 90 सेंटीमीटर और वजन 115 से 200 किलोग्राम तक होता है। इतनी छोटी होने के बावजूद, यह गाय बहुत मजबूत और उपयोगी है। इसका रंग सफेद, हल्का ग्रे, भूरा या लाल हो सकता है। माथा चौड़ा होता है, और सींग छोटे, चंद्राकार होते हैं जो पीछे की ओर मुड़ी रहती हैं। नर गायों में सींग थोड़े ढीले होते हैं, जबकि मादा में वे आगे की ओर झुके रहते हैं। इस नस्ल की गायें शांत स्वभाव की होती हैं, आसानी से पाली जा सकती हैं और गर्म मौसम में भी अच्छी तरह जीवित रहती हैं।
इस नस्ल की शुरुआत सदियों पुरानी है। पुराने राजाओं और जमींदारों ने इसे विकसित किया था। चित्तूर के राजपरिवार ने इसे खास तौर पर पाला, क्योंकि यह छोटी होने से घरों में आसानी से रखी जा सकती थी। प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में पुंगनूर गाय के दूध, गोबर और मूत्र की औषधीय गुणों का जिक्र है। यह गाय सूखे चारे पर भी जीवित रह सकती है, जैसे घास, भूसा या पुआल। एक दिन में यह सिर्फ 5 किलोग्राम चारा खाती है, लेकिन दूध 3 से 5 लीटर तक देती है। दूध में वसा की मात्रा ज्यादा होती है, जो घी बनाने के लिए बेहतरीन होता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इसका दूध A2 प्रकार का होता है, जो पाचन के लिए अच्छा है और कई बीमारियों से बचाता है।
हाल के सालों में पुंगनूर नस्ल की लोकप्रियता बढ़ी है, खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कारण। अक्सर मकर संक्रांति पर वे इन गायों के साथ समय बिताते हैं। इस साल, 15 जनवरी को पीएमओ ने एक 39 सेकंड का वीडियो जारी किया, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी चार छोटी गायों को हरा चारा खिला रहे हैं और उनके साथ खेल रहे हैं। ये गायें पुंगनूर नस्ल की लगती हैं, जो आंध्र प्रदेश की दुर्लभ नस्ल है। वीडियो में मोदी जी गायों को सहला रहे हैं, और गायें बड़े प्यार से उनके पास आ रही हैं। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इसे शेयर करते हुए कहा, “पीएम मोदी गौ-सेवा कर रहे हैं, जो भारत की संस्कृति को दर्शाता है।” पिछले साल भी उन्होंने छह पुंगनूर गायों को चारा खिलाया था। यह परंपरा न सिर्फ त्योहार मनाने का तरीका है, बल्कि देशी नस्लों के संरक्षण का संदेश भी देती है।
न सिर्फ मोदी जी, बल्कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी हाल ही में गोरखनाथ मंदिर की गोशाला में पुंगनूर गायें लाई हैं। सितंबर 2024 में उन्होंने इन गायों को गुड़ खिलाया और दुलार किया था। केंद्रीय मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने भी एक पुंगनूर गाय खरीदी है। ये घटनाएं दिखाती हैं कि ऊंचे पदों पर बैठे नेता इस नस्ल को बढ़ावा दे रहे हैं, जिससे किसानों में रुचि बढ़ रही है।
2025-2026 में पुंगनूर गाय से जुड़ी कई नई खबरें आई हैं। जनवरी 2026 में केरल के कोझिकोड में दक्षिणी डेयरी और फूड कॉनक्लेव में इस नस्ल की गाय स्टार बनी। यहां पर 97 सेंटीमीटर ऊंची एक पुंगनूर गाय को देखने के लिए लोग उमड़ पड़े। इसी महीने, ओडिशा के भुवनेश्वर में एमपीएसओ 2026 में इसे प्रदर्शित किया गया। अक्टूबर 2025 में राजस्थान के पुष्कर मेले में पुंगनूर गाय ने सबका ध्यान खींचा। ये मेले और प्रदर्शनियां इस नस्ल को बचाने और फैलाने में मदद कर रही हैं।
संरक्षण के प्रयासों में भी तेजी आई है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने जनवरी 2026 में दिल्ली में पशु नस्ल पंजीकरण और संरक्षण पुरस्कार दिए। इसमें कुडाला राम दास को पुंगनूर गाय के संरक्षण के लिए दूसरा पुरस्कार मिला। आईसीएआर का कहना है कि यह नस्ल द्विउद्देशीय है – दूध और कृषि कार्य दोनों के लिए। लेकिन आधुनिक नस्लों के कारण यह विलुप्त होने के कगार पर है। सिर्फ कुछ सौ गायें बची हैं, ज्यादातर आंध्र प्रदेश में। सरकार अब इसे बढ़ावा दे रही है, जैसे किसानों को सब्सिडी और प्रशिक्षण।
नवंबर 2025 में छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में पहली बार पुंगनूर नस्ल की मादा बछिया का जन्म हुआ। पीएम मोदी के वीडियो के बाद इस नस्ल की मांग बढ़ गई है, जिससे पशुपालन में नई उम्मीद जगी है। जुलाई 2025 में एक रिपोर्ट में कहा गया कि 2025 में पुंगनूर गाय की मांग बढ़ रही है, क्योंकि इसका दूध A2 प्रकार का है और टिकाऊ डेयरी के लिए उपयुक्त है।
पुंगनूर गाय के फायदे कई हैं। इसका दूध पौष्टिक है, जिसमें 8 प्रतिशत तक वसा होती है। आयुर्वेद में इसका मूत्र कीड़ों को मारने और पेट की बीमारियों जैसे गैस, एसिडिटी और खांसी में उपयोगी बताया गया है। छोटी होने से इसे शहरों में भी पाला जा सकता है, जैसे पालतू जानवर। कुछ लोग इसे घर में रखते हैं, क्योंकि यह कम जगह लेती है और बीमारियां कम होती हैं। लेकिन कीमत ज्यादा है – एक गाय लाखों रुपये की हो सकती है।
सांस्कृतिक रूप से, पुंगनूर गाय भारत की विरासत है। हिंदू धर्म में गाय को मां माना जाता है, और इस नस्ल को बचाना जरूरी है। मोदी जी का वीडियो इसी संदेश को मजबूत करता है। वे कहते हैं कि गौ-सेवा से संस्कृति जीवित रहती है। हाल की घटनाओं से लगता है कि 2026 में इस नस्ल को और बढ़ावा मिलेगा, जैसे नए फार्म और रिसर्च।
अंत में, पुंगनूर गाय न सिर्फ छोटी और प्यारी है, बल्कि उपयोगी भी। पीएम मोदी का इसके साथ समय बिताना हमें याद दिलाता है कि छोटी चीजों में बड़ी ताकत होती है। अगर आप भी किसान हैं या गौ-प्रेमी, तो इस नस्ल को अपनाएं। मकर संक्रांति की शुभकामनाएं!
