लीबिया की राजनीति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा हलकों में उस वक्त हलचल मच गई, जब पश्चिमी लीबिया की संयुक्त राष्ट्र समर्थित सरकार (GNU) के आर्मी चीफ और चीफ ऑफ जनरल स्टाफ मोहम्मद अली अहमद अल-हद्दाद की तुर्की में विमान दुर्घटना में मौत हो गई। यह हादसा ऐसे समय पर हुआ है, जब कुछ ही दिन पहले पाकिस्तान ने लीबिया की प्रतिद्वंद्वी लिबियन नेशनल आर्मी (LNA) के साथ करीब साढ़े चार अरब डॉलर की कथित हथियार डील की है। इसी संयोग ने इस प्लेन क्रैश को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तुर्की में कैसे हुआ हादसा?
मोहम्मद अली अहमद अल-हद्दाद एक उच्चस्तरीय सैन्य प्रतिनिधिमंडल के साथ तुर्की की यात्रा पर थे। यह प्रतिनिधिमंडल अंकारा में तुर्की के सैन्य नेतृत्व के साथ रक्षा सहयोग से जुड़ी बैठकों के बाद लीबिया की राजधानी त्रिपोली लौट रहा था। इसी दौरान अंकारा के पास विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
इस हादसे में विमान में सवार सभी आठ लोगों की मौत हो गई। मृतकों में अल-हद्दाद के अलावा थलसेना प्रमुख अल-फितूरी ग़रीबिल, सैन्य विनिर्माण प्राधिकरण के निदेशक महमूद अल-क़तावी, सैन्य सलाहकार मुहम्मद अल-असावी दियाब, सैन्य फोटोग्राफर मुहम्मद उमर अहमद महजूब और चालक दल के तीन सदस्य शामिल हैं।
शुरुआती जांच में साजिश से इनकार
तुर्की के अधिकारियों के अनुसार, विमान ने उड़ान के लगभग 40 मिनट बाद आपात लैंडिंग की मांग की थी। पायलट ने ‘इलेक्ट्रिकल फॉल्ट’ की सूचना दी थी और विमान को वापस अंकारा के एसेनबोगा एयरपोर्ट की ओर मोड़ा गया, लेकिन इससे पहले की विमान सुरक्षित लैंडिंग कर पाता यह दुर्घटना हो गई। शुरुआती जांच रिपोर्ट में किसी तरह की तोड़-फोड़ या साजिश के संकेत नहीं मिले हैं और तकनीकी खराबी को हादसे की वजह बताया गया है। हालांकि तुर्की के न्याय मंत्रालय ने औपचारिक आपराधिक जांच के आदेश दिए हैं।
अल-हद्दाद कौन थे?
2011 में मुअम्मर गद्दाफी के पतन के बाद लीबिया दो मुख्य गुटों में बंट गया। पश्चिमी लीबिया की राजधानी त्रिपोली में अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त गवर्नमेंट ऑफ नेशनल यूनिटी (GNU) है, जबकि पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों पर जनरल खलीफा हफ्तार के नेतृत्व वाली लिबियन नेशनल आर्मी (LNA) का प्रभाव है।
मोहम्मद अली अहमद अल-हद्दाद GNU के शीर्ष सैन्य कमांडर थे और उन्हें तुर्की का समर्थन प्राप्त था। खास बात यह थी कि अल-हद्दाद उन चुनिंदा सैन्य नेताओं में गिने जाते थे, जिन्हें लीबिया के दोनों धड़ों में सम्मान की नजर से देखा जाता था।
पाकिस्तान-लीबिया आर्म्स डील से जुड़ रहे सवाल
हादसे को लेकर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि हाल ही में पाकिस्तान ने लीबियन नेशनल आर्मी (LNA) के साथ बड़े पैमाने पर हथियार सौदे की खबरों के बीच सुर्खियां बटोरी हैं। यह वही गुट है, जो अल-हद्दाद की अगुवाई वाली पश्चिमी लीबिया की सरकार का विरोधी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि लीबिया का पूर्वी हिस्सा 2011 से ही अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के दायरे में है, ऐसे में वहां हथियारों की आपूर्ति वैश्विक चिंता का विषय बन सकती है। आशंका जताई जा रही है कि इन हथियारों का इस्तेमाल या उनकी सप्लाई चरमपंथी संगठनों तक भी पहुंच सकती है।
तुर्की, चीन और अंतरराष्ट्रीय राजनीति का एंगल
इस पूरे घटनाक्रम में तुर्की की भूमिका भी चर्चा में है, क्योंकि वह हाल के वर्षों में पाकिस्तान और पश्चिमी लीबिया दोनों का अहम रक्षा सहयोगी बन चुका है। वहीं, कुछ विश्लेषक यह भी मानते हैं कि पाकिस्तान के जरिए चीनी हथियारों के युद्धग्रस्त क्षेत्रों तक पहुंचने की संभावना अंतरराष्ट्रीय शक्तियों की चिंता बढ़ा सकती है। हालांकि, फिलहाल तुर्की और लीबिया की आधिकारिक एजेंसियों ने विमान हादसे को दुर्घटना ही बताया है और किसी भी तरह की साजिश की पुष्टि नहीं की है।
जांच जारी, अटकलें बरकरार
तुर्की में CCTV फुटेज में रात के आसमान में तेज रोशनी दिखाई देने के दावों के बाद सोशल मीडिया पर साजिश की अटकलें जरूर लगाई जा रही हैं, लेकिन जांच एजेंसियां इन्हें शुरुआती और अपुष्ट मान रही हैं। अंतिम जांच रिपोर्ट आने तक यह सवाल बना रहेगा कि क्या यह महज तकनीकी दुर्घटना थी या फिर इसके पीछे क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति की कोई गहरी परत छिपी है।
