नई दिल्ली, 6 दिसंबर 2025 : भारतीय विमानन क्षेत्र में उथल-पुथल मचाने वाली हालिया घटना ने लाखों यात्रियों की जिंदगियां तहस-नहस कर दी है। इंडिगो एयरलाइंस की लगातार उड़ानें रद्द होने से देशभर के हवाई अड्डों पर हाहाकार मच गया है। मात्र चार दिनों में 2,000 से अधिक उड़ानें रद्द हो चुकी हैं, जिससे करीब 3 लाख यात्री प्रभावित हुए हैं। इस संकट ने न केवल यात्रियों को आर्थिक और भावनात्मक नुकसान पहुंचाया, बल्कि अन्य एयरलाइंस की टिकट कीमतों को भी 3-4 गुना तक उछाल दिया है। विपक्षी दलों से लेकर परेशान यात्रियों तक हर तरफ इंडिगो, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) और केंद्र सरकार पर लापरवाही का आरोप लग रहा है। आखिर यह संकट कैसे पैदा हुआ? क्या हैं इसके पीछे की वजहें? और अब क्या होगा? आइए, जानते हैं पूरी कहानी।
संकट की शुरुआत: क्रू की कमी और नियमों का उल्लंघन
यह संकट नवंबर 2025 से शुरू हुआ, जब डीजीसीए ने फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (एफडीटीएल) नियमों को सख्ती से लागू किया। इन नियमों का मकसद पायलटों और क्रू मेंबर्स की थकान को कम करना और सुरक्षा सुनिश्चित करना है। लेकिन इंडिगो जैसी बड़ी एयरलाइंस, जो बाजार में 60% से अधिक हिस्सेदारी रखती है, ने वर्षों से इन नियमों का उल्लंघन किया। पायलटों को ड्यूटी घंटों से अधिक काम करवाकर उड़ानें संचालित की जाती रहीं, जो अवैध था।
जब डीजीसीए ने नवंबर 1 से नए नियम लागू किए, तो इंडिगो के पास पर्याप्त क्रू नहीं बचा। नतीजा? उड़ान रद्दीकरण की बाढ़। नवंबर में 1,232 उड़ानें रद्द हुईं, जिनमें से 755 एफडीटीएल उल्लंघन के कारण। दिसंबर में यह संख्या और बढ़ गई। 6 दिसंबर तक दिल्ली, कोलकाता, हैदराबाद, लखनऊ और देश के अन्य हवाई अड्डों से सैकड़ो उड़ानें रद्द हो चुकी हैं। इंडिगो के सीईओ ने स्वीकार किया कि क्रू की कमी के कारण संचालन प्रभावित हुआ है, और सामान्य स्थिति 10-15 दिसंबर तक बहाल हो सकती है। लेकिन सवाल यह है कि इतनी बड़ी कंपनी ने पहले ही तैयारी क्यों नहीं की?
एविएशन विशेषज्ञ येशवंत शेनॉय का कहना है, “यह समस्या वर्षों पुरानी है। इंडिगो ने जानबूझकर नियम तोड़े, और डीजीसीए ने नजरअंदाज किया। अब जब नियम लागू हुए, तो कंपनी सरकार को ब्लैकमेल कर रही है।” ब्रांड स्ट्रैटेजिस्ट सुहेल सेठ ने इसे “अक्षम्य” करार देते हुए कहा कि इंडिगो का रवैया गैर-जिम्मेदाराना है, और सरकार को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
यात्रियों पर कहर: आंसू, गुस्सा और आर्थिक चोट
यात्रियों की कहानियां दिल दहला देने वाली हैं। रेडिट पर एक यूजर ने लिखा, “शादियां, जन्मदिन, अंतिम संस्कार- सब छूट गए। इंडिगो ने हमें जानवरों की तरह सड़क पर छोड़ दिया।” कोलकाता एयरपोर्ट पर महिलाएं रोती नजर आईं, अहमदाबाद में एक यात्री का वीडियो वायरल हो गया जहां वह घंटों इंतजार के बाद टूट गया। भुवनेश्वर से एक यात्री ने बताया कि विकलांग बच्चे और बुजुर्ग के साथ यात्रा कर रहे थे, लेकिन इंडिगो के कस्टमर केयर का फोन ही नहीं उठा।
सबसे बड़ा झटका आया टिकट कीमतों पर। डायनामिक प्राइसिंग के कारण, दिल्ली-पटना जैसे छोटे रूट पर किराया 50,000 रुपये तक पहुंच गया- जो की सामान्य से 3-4 गुना अधिक है। कुछ मामलों में प्राइसिंग में 10 गुना तक उछाल देखा गया। शादी-ब्याह के मौसम में यह टिकट के कीमत की मार और गहरी हो गई। रेडिट यूजर्स ने सलाह दी कि एयरसेवा पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। यूजर्स ने लिखा की डीजीसीए नियमों के तहत रद्दीकरण पर पूरा रिफंड और साथ में मुआवजा भी (5,000 से 10,000 रुपये) मिलना चाहिए। लेकिन कई ग्राहकों की शिकायत है कि उन्हें ऑटोमेटेड रिजेक्शन का सामना करना पड़ा।
एक्स (पूर्व ट्विटर) पर हाहाकार मचा है। अभिनेता सोनू सूद ने स्टाफ से “दयालु” बने रहने की अपील की, लेकिन कई यूजर्स ने उनकी इस मांग को खारिज कर दिया।
डीजीसीए और सरकार की निष्क्रियता: ड्यूओपॉली का अभिशाप
भारतीय विमानन में इंडिगो और एयर इंडिया का ड्यूओपॉली (दो कंपनियों का वर्चस्व) संकट को और गहरा बना रहा है। एक कंपनी का संकट पूरे नेटवर्क को ठप कर देता है। डीजीसीए पर आरोप है कि उसने वर्षों तक उल्लंघनों को नजरअंदाज किया। संकट के दौरान डीजीसीए ने ही नियमों में ढील दी- फरवरी 2026 तक रोटेशन नियम स्थगित कर दिए। विपक्षी नेता कार्ति चिदंबरम ने कहा, “यह डीजीसीए और एयरलाइन दोनों की नाकामी है।”
सरकार की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही। नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा, “इंडिगो की लापरवाही की जांच होगी, दोषी पाए जाने पर कार्यवाई सुनिश्चित की जायेगी।” कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं, ऑटो रिफंड का आदेश दिया गया है, और वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष सुविधाएं। आप पार्टी ने केंद्र पर हमला बोलते हुए टिप्पड़ी की: “हजारों यात्री परेशान, सरकार गायब।” समाजवादी पार्टी की सांसद डिम्पल यादव ने कहा, “सरकार हस्तक्षेप करे, वरना यह मनमानी जारी रहेगी। टिकटें नॉन-रिफंडेबल दिखाई जा रही हैं।” एनसीपी-एससीपी की सुप्रिया सुले ने संसदीय जांच की मांग की, जबकि कांग्रेस के राजीव शुक्ला ने राहत की कमी पर सवाल उठाए। रेलवे ने इस संकट में कूदकर 37 प्रीमियम ट्रेनों में 116 अतिरिक्त कोच जोड़े, जिससे रोज 35,000 यात्री लाभान्वित हो सकते हैं। लेकिन यह अस्थायी समाधान है।
क्या है समाधान? भविष्य की चेतावनी
विशेषज्ञों का कहना है कि ड्यूओपॉली तोड़ना जरूरी है- नई एयरलाइंस को बढ़ावा, क्षेत्रीय रूट्स पर क्षमता बढ़ाना, और डीजीसीए को मजबूत बनाना। एफएआईआई की डॉ. वंदना सिंह कहती हैं, “एक कंपनी का संकट पूरे नेटवर्क को नष्ट न करे, इसके लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ानी होगी।” इंडिगो के शेयर 7% गिर चुके हैं, लेकिन यात्रियों का नुकसान अनमोल है।
सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर हो चुकी है। अगर सरकार और डीजीसीए ने सुधार नहीं किए, तो यह संकट दोबारा आ सकता है। यात्रियों से फिलहाल ये अपील है की: एयरसेवा पर अपनी शिकायत करें। क्या यह विमानन क्षेत्र में सुधार की शुरुआत होगी, या सिर्फ एक और स्कैंडल? इस सवाल का जवाब समय देगा, लेकिन आप अपनी राय हमें बता सकते है कमेंट सेक्शन में।
